Friday, November 21, 2008

अनाम का नाम बदनाम करते हुए...

अनाम के नाम से किसी लड़की को बेहूदें और भद्दे कमेन्ट करना आखिर किस मानसिकता को दर्शाता है। ये सवाल पिछले कई दिनों से मैं ख़ुद से पूछ रही हूँ। आखिर क्या सोच होगी किसी अनजान लड़की से इस तरह की बात करने के पीछे। यही है मेरी इस पोस्ट का विषय।
कुछ महीने पहले ही इस ब्लॉग को मैंने और भुवन ने मिलकर बनाया। इस ब्लॉग का नाम लूज़ शटिंग इस लिए रखा क्योंकि हम हमेशा से ही कुछ अलग रहनेवाले और अलग सोच रखनेवाले लोग रहे हैं। ऐसा नहीं है कि मुझे इससे पहले अपनी बात कहने के लिए मंच नहीं मिला हो। वक़्त बेवक़्त मैं अपनी बातें और अनुभव मोहल्ला के ज़रिए सामने लाती ही रही। लेकिन, फिर भी मन में कही था कि एक कोना ऐसा हो जिसे मैं संवार सकूं। मेरी पोस्ट हमेशा से ही किसी तात्कालिक विषय से जुड़ी होती हैं। कोई ऐसी घटना जो मेरे आगे हुई और मुझे सोचने पर मजूबर कर गई हो। मैं इस ब्लॉगरूपी कैनवास पर उसे उकेर देती हूँ। बात ये भी है कि मैं बहुत गहन और लंबे विचार कर ही नहीं पाती हूँ। इसलिए ऐसे किसी भी ऐसे मुद्दे पर लिखने का माद्दा नहीं रखती हूँ जो लंबे समय से चला आ रहा हो या कुछ ऐसा जो किसी और के साथ हुआ हो। यही वजह है कि मेरे पिछले कई पोस्ट मेरी रोज़मर्रा की बस यात्रा से जुड़े हुए थे। जिन पर कई कमेन्ट आते थे। कुछ खट्टे, तो कुछ मीठे। इन्हीं में से मेरी एक पोस्ट बदलती नीयतें पर एक अनाम का कमेन्ट आया। एक बेहद ही बेहूदा कमेन्ट जो मेरी लेखनी पर नहीं मेरे लड़की होने पर था। उसे पढ़ने के बाद अचानक से ही मैं सिहर उठी और दो मिनिट के लिए समझ नहीं आया कि क्या करूँ। फिर कुछ सोचकर ब्लॉग मोडरेटर भुवन को कहा कि वो उस कमेन्ट को हटा दे। कमेन्ट हटाने के बाद भुवन ने मुझसे पूछा कि क्या मोडरेट लगा दूँ या फिर अनाम का ऑप्शन हटा दूँ। मैंने एकदम मज़बूती के साथ कहा कि नहीं ऐसे लोगों से डरना नहीं हैं। कुछ दो ही दिन बीते थे कि एक और इसी तरह का कमेन्ट आया। इस बार पता नहीं मेरी मज़बूती कहा चली गई। मैं रोने लगी और फ़ोन करके भुवन को कहा कि प्लीज़ मोडरेटर लगा दो। मन कुछ दिन तक बेहद उदास रहा। लगा कि कैसे घटिया लोग हैं। फिर लगा लिखना ही छोड़ दूँ। फिर धीरे-धीरे लगा कि ये सब जीवन का हिस्सा है और चलता रहेगा। मैं फिर लिखने लगी। लेकिन, वो बात आज तक मन में है कि आखिर क्या है उस घटिया मानसिकता के पीछे।
इस सब में जो सबसे ख़ास है वो है कि मोडरेटर लगने के बाद से एक भी ऐसा कमेन्ट नहीं आया है। इसका मतलब क्या हुआ... अगर तो कोई मुझे वो घटिया बातें बोलना चाहता तो वो कमेन्ट करता ही। मैं तो उन्हें पढ़ ही सकती हूँ, हाँ पोस्ट नहीं करती मैं। लेकिन, उस अनाम ने कोई कमेन्ट नहीं किया... आखिर क्यों... क्या वो लोगों के सामने वो कहना चाहता हैं... या फिर क्या... आखिर क्या सोच है... क्या मानसिकता है इस सब के पीछे...

9 comments:

masijeevi said...

ब्‍लॉगजगत भी दुनिया ही है। न केवल अच्‍छे-बुरे लोग यहॉं हैं वरन अच्‍छों के बुरे पक्ष तथा बुरों के अच्‍छे पक्ष भी हैं..जैसा की वास्‍तविक दुनिया में होता है-

बेनाम होने का बदनीयत होने से कुछ लेना देना है- हम हमेशा की तरह कहते हैं कि नहीं..। लोग इसलिए बदनीयत नहीं हैं क्‍योंकि वे बेनाम हैं। सच्‍चाई तो यह है कि नामवरों की बदनीयती ही अक्‍सर बेनाम होकर बाहर आती है। फिर आप तो मोहल्‍ले से जुड़ी रही हैं...बेहतर जानती हैं कि ये बेनाम बीच के ही होते हैं।

नीलिमा के चिट्ठे पर आए बेनाम बेहद आपत्तिजनक कमेंट्स की पड़ताल की और आईपी ट्रेक किया तो हैरान रह गए... ये बेनामदास बेहद नामवर और प्रतिष्ठित ब्‍लॉगर थे।

पर वही बात...इनके चलते पलायन करेंगी तब तो इनकी चालें सफल ही करना हुआ..वे नहंी चाहते कि आप बस में, सड़क पर, ब्‍लॉग में कहीं भी दिखें ..आप कहॉं कहॉं से लुप्‍त होंगी।

raj said...

यह टिप्पणी पढने से पहले हम कुछ लोग यह चर्चा कर रहे थे कि कुछ लोग परपीड़ा में ही आनंद पाते हैं। लेकिन ऐसे लोग स्वाभाव से डरपोक भी होते हैं। सामने आकर कुछ भी करने/कहने की स्थिति में नहीं होते। अनाम साहब को जैसे ही लगा कि आप की ओर से एहतियाती उपाय हो रहे हैं, उन्होंने लिखना छोड़ दिया।

raj said...

aapki badalti niyat wali post bhi bahut achchhee hai. baki batein apni jagah, par bhopal vakai bahut achchhi jagah hai. jo ek bar bhopal mein rah le, phir use dusra koi shahar khas achchha nahin lagta. aur phir makhanlal univercity ki to bat hi alag hai.aapki post padhkar bhopal ki badi shiddat se yad aai.

अविनाश said...

ये वो लोग हैं दीप्ति, जो ये समझते हैं कि अभिव्‍यक्ति सिर्फ और सिर्फ मर्दों की बपौती है। आप इनकी छाती पर मूंग दलती रहो और सबसे बेहतर लिख कर इनके हौसले पस्‍त करती रहो।

Dr. Amar Jyoti said...

ऐसे कापुरुषों से डरना नहीं लड़ना होगा। आप लिखती रहिये और यदि संभव हो तो इन जैसों को बेनक़ाब भी करिये।

Anil Pusadkar said...

अनाम लोग उन सभी के खिलाफ़ कमेण्ट्स करते है,जो उन्हे पसन्द नही आते। मैने भी आपकी तरह माडरेटेर नही लगाने का फ़ैसला कुछ ही दिनो मे बदल दिया था।ये कमज़ोर लोग है और अपनी कमज़ोरी दूसरो पर थोपने के षड्यंत्र मे लगे रह्ते है,कुछ तो दुर्जन होते ही है और कुछ सज्जन भी इसकी आड मे दुर्जन बन जाते है। ऐसे लोगो की परवाह करने की ज़रुरत नही है। आप तो बस लिखिये और लिख कर उनको मुंह्तोड़ जवाब दिजिये।

ranjan said...

आप तो लिखती रहें.. और एसे ’लुज कमेंट्स’ को ignore करें..

रौशन said...

हमने भी मोडरेशन नही ऑप्ट किया है एक साहब ने तो हमारे ही नाम से हमारे ही ब्लॉग पर एक टिप्पणी दे मारी.
मसिजीवी साहब ने अगर इस तरह की टिप्पणी करने वाले को ट्रैक किया था तो उनकी असलियत भी सामने लानी चाहिए थी जिससे ऐसे लोगों पर रोक लग सके

Anonymous said...

benam likhane ka maja avinash se puchhiye ? mohalle par apani post ko chmakane me kahi aap ne bhi usi rah par chalane ka nirnay to nahi le liye ji