Friday, August 14, 2009

मैं खोज रही हूँ मेरा लव आजकल...

कुछ दिन पहले मेरी दोस्त का फोन आया था। इधर-उधर की कुछ बातें हुई और फिर उसने बताया कि उस लड़के तलाक़ हो गया है, जिससे कुछ साल पहले उसका रिश्ता था। वो रिश्ता क्या था ये तो आज तक वो खु़द नहीं जानती है। उनके बीच का प्यार एक लॉन्ग डिस्टेन्स रिलेशनशिप था जिसमें कोई बंधन नहीं था। मेरी दोस्त इससे खुश भी थी लेकिन, वो लड़का इससे आगे बढ़ना चाहता था। दोस्त को मां-बाप की सहमति चाहिए थी जो लेने की हिम्मत उस लड़के में नहीं थी। आखिरकार उसने माँ-बाप की मर्ज़ी से शादी कर ली। और, आज हालत ये है कि दो साल में ही वो रिश्ता टूट गया। अब मेरी दोस्त दुखी है। लड़के के बारे में बताते-बताते वो कहने लगी कि उसने फिलहाल में ही लव आजकल देखी। उसने मुझसे पूछा- यार ज़िंदगी क्यों नहीं इतनी आसान होती जितनी कि फ़िल्म की कहानी। मेरे पास कोई ज़वाब नहीं था। खैर, हम कुछ देर यूँ ही बात की और फोन रख दिया।
लेकिन, मैं उदास हूँ। मैंने भी लव आजकल देखी है। फ़िल्म में एक साथ दो कहानियाँ चलती हैं। एक पुराने ज़माने की, तो दूसरी आज की, अभी की। शायद मेरी या मेरे दोस्तों की या मेरे भाई बहनों की।
किसी की जो मुझमें से एक हैं। लेकिन, वो एक कौन हैं... मैं उसे खोज रही हूँ। मैं पच्चीस साल की हूँ और मेरे मामा-चाचा के बच्चे, मेरे दोस्त, मेरे सहकर्मियों में से अधिकतर सभी लगभग इसी उम्र के हैं। इनमें से कुछ रिलेशनशिप में भी हैं। लेकिन, आज तक किसी ने ये खुलकर नहीं कहा कि उनके इस रिश्ते में शारीरिक संबंध है या नहीं। कइयों के रिश्ते टूटे भी हैं लेकिन, उनकी हालत ऐसी है कि एक-दूसरे से नज़रें मिलाने में भी वो आज कतराते हैं। हम सभी बंदिंशों में जकड़े हुए हैं। लव आजकल से एकदम इतर। शायद सभी की कहानी ऐसी न हो या फिर मेरे आसपास की कहानी ऐसी नहीं है। कैसे एक झटके में दीपिका अपने पति को ये कह देती है कि मुझे उसके पास जाना है और तुमसे मैं बाद में माफ़ी मांग लूंगी। दीपिका अपनी मर्ज़ी से शादी करती है और उसके बाद उसे छोड़ देती हैं। इस सब के बावजूद सब कुछ सामान्य रहता है। मेरी एक बहन ने पसंद से शादी की है उसके पति उसे परेशान करते हैं। वो दुखी है लेकिन, उसे छोड़ने की हिम्मत उसमें नहीं। क्यों वो बोल नहीं पाती हैं कि अब अलग होते है, खुशी-खुशी। मैं अपनी ज़िंदगी में कोई फ़ैसला ख़ुद नहीं लेती या ये कहूँ कि ले नहीं सकती। वजह मेरे मम्मी-पापा। बहुत हद तक मेरे हर फ़ैसलें पर उनकी छाया होती हैं। लेकिन, फ़िल्मों से माँ-बाप गायब से हो गए हैं। वो तब ही आते हैं जब उनकी ज़रूरत हो। खाना-पूर्ति करके वो गायब हो जाते हैं। लव आजकल में भी यही हुआ माँ-बाप शादी के वक़्त फूल डालते ही केवल नज़र आएं। मैं अपने आसपास फैले लोगों के बीच आजकल का लव खोज रही हूँ। लेकिन, मुझे वो कही दिखाई नहीं दे रहा हैं। मैं परेशान हूँ, मैं खोज रही हूँ मेरा लव आजकल...

8 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

Aaj kal ka love hai kuch different to hoga hi..rahi baat film ki to dipti ji aaj kal film me kahaniyon ka sangam hota hai..

pata nahi chalata ki kitani kahaniya lekar chalate rahate hai ..

विनय ‘नज़र’ said...

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
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INDIAN DEITIES

Nirmla Kapila said...

फिल्म और यथार्थ जीवन मे अन्तर होता है प्रश्न फिर भी अपनी जगह ख्डा है शायद इसका जवाब किसी के पास नहीं आभार्

chanu said...

india main pyar ek verjit bat mani jati hain...lekin phir bhi yah hota to hain...hum gharvalon ki vajah se rishto main bandhte hain aur sari jindagi usi main khapa dete hain...main 31 sal ka hu aur jald hi insab se gujrne vala hooon..aap kya kar sakte hain..bataye

chanu said...

india main pyar ek verjit bat mani jati hain...lekin phir bhi yah hota to hain...hum gharvalon ki vajah se rishto main bandhte hain aur sari jindagi usi main khapa dete hain...main 31 sal ka hu aur jald hi insab se gujrne vala hooon..aap kya kar sakte hain..bataye

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

:(

:)

sushant jha said...

दीप्ती...अच्छा पोस्ट है।

सलाम ज़िन्दगी said...

"हर अहद में हर चीज़ बदलती रही लेकिन
एक दर्द-ए-मोहब्बत है जो पहले की तरह है।"..
प्यार का एहसास वही है बस देखने का नज़रिए और जताने का तरीका बदल चुका है।
सुधी सिद्धार्थ