Friday, September 24, 2010

हद हैः खेलों के दौरान सब्जी मंडियों पर पाबंदी

कॉमनवेल्थ खेलों का आम दिल्ली वालों की सब्जी-भाजी से क्या ताल्लुक हो सकता है! आपको ये बड़ा बेतुका सवाल लग सकता है लेकिन जब आप इसकी हकीकत से रु ब रु होंगे तो समझ में आएगा! मैं अक्षरधाम के पास पांडव नगर में रहता हूं! पिछले दो-तीन दिनों की लगातार बारिश के बाद आज शाम में अपने मोहल्ले की सब्जी मंडी में गया! देखा तो वहां का हुलिया काफी बदला-बदला सा नज़र आया! सब्जीवालों के ठेले गायब थे! सबके सब जमीन पर बोरे और प्लास्टिक बिछा कर सब्जियां बेच रहे थे! पहले तो वजह समझ में नहीं आई लेकिन जब सब्जी लेने के दौरान पूछताछ की तो पता चला! सब्जी वाले ने बताया कि आज तो सब्जियां मिल भी रही हैं कल से ये भी नहीं मिलने वाली! दरअसल कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन के चलते खेल स्थलों के आस-पास के बाज़ारों पर पाबंदी लगा दी गई है! तीन अक्टूबर को कॉमनवेल्थ खेलों का उद्‍घाटन किया जाएगा जबकि समापन समारोह चौदह अक्टूबर को होगा! और इस वजह से सब्जी मंडी अभी से बंद रहेगी! बीच में शायद एक या दो दिन ये पाबंदी थोड़े समय के लिए हटाई जाए! लेकिन फिलहाल सब्जी मंडी पर इस अघोषित कर्फ़्यू का असर साफ देखने को मिल रहा था! बारिश की वजह से सब्जियों के दाम पहले से ही चढ़े हुए थे और इस पाबंदी ने कीमतों में और इज़ाफा कर दिया! दस से बारह रुपए किलो मिलने वाला आलू आज बीस और बाइस रुपए था जबकि पंद्रह से अठारह रुपए किलो मिलने वाला प्याज आज तीस रुपए मिल रहा था! यही नहीं बाकी सब्जियों के बढ़े हुए दाम भी मुझे मुहं चिढ़ा रहे थे! तब महसूस हुआ खेलगांव के पास रहने का नुकसान! मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि खेलों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का ये कौन सा तरीका है! अगर सब्जियों के बाज़ार बंद करने से आतंकवादी हमलों को रोका जा सकता है तब तो सारे बाज़ार बंद कर दिए जाने चाहिए! तब तो हमले की कोई आशंका ही नहीं रहेगी! ये कुछ-कुछ चीन जैसी ही बात हो गई! चीन में पिछले साल हुए भव्य स्वतंत्रता समारोह में वहां के आम लोगों को शिरकत करने की अनुमति नहीं थी! यहां तक की उन्हें समारोह के दिन घरों से निकलने, अपने घरों के खिड़की, दरवाजों को भी खोलने पर पाबंदी लगा दी गई थी! दरअसल ये जामा मस्जिद के पास हुई गोलीबारी के बाद हुई किरकिरी और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने के अपने ही वादों पर भरोसा नहीं हो पाने की वजह से हो रहा है! दिल्ली पुलिस को लगता है कि इस तरह से वो आतंकी वारदातों पर लगाम लगा सकती है! चलिए हम भी दुआ करते हैं कि खेलों के दौरान ही नहीं खेलों के बाद भी देश आतंकी हमलों से महफूज रहे! और रही आम जनता की परेशानियों की बात तो उसे तो आदत है इन सब चीजों को भी वो झेल ही जाएगी!

5 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

यहां कुछ भी सम्भव है..

Dipti said...

सुरक्षा में कोई कमी न रहे और कही किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। तो इसके लिए सबसे आसान उपाय जड़ें ही उखाड़ दो। न रहे लोग, न होगी भीड़ और न ही होगी सुरक्षा में कोई चूक। वाह वाही मिलेगी मुफ्त में...

विवेक Call me Vish !! said...

wahh bahut khoob achha laga apke blog ko padkar kuch alag rha safar...


JAI HO MANGALMAY HO

शरद कोकास said...

भाई सब्ज़ी मे अगर क्द्दू मे बम हुआ तो ?

शरद कोकास said...

हमारे यहाँ तो खेल नही है फिरभी सब्ज़ियों के भाव बढे हुए है ।