Wednesday, April 25, 2012

लेखकों को पढ़ा जाना चाहिए, न कि देखा: रस्किन बॉण्ड

रस्किन बॉण्ड का साक्षात्कार... रस्किन बॉण्ड जिसे पढ़ा और एक लाल स्वेटर में तस्वीरों में देखा भर था उनसे मिलना, उनकी ज़िंदगी के बारे में बातचीत करना और उन्हें समझना। इतना कुछ करने का मौका अचानक मिल जाना किसी करिश्मे से कम नहीं। ऑफिस ने तय किया कि चार लोगों की टीम को मसूरी उनके शहर भेजा जाएगा। इस टीम में मैं भी शामिल थी बतौर प्रोड्यूसर। इधर-उधर से जुगाड़ करने के बाद हमें एक नंबर मिला और नंबर पर फोन घुमाते ही हमारी बात हुई रस्किन बॉण्ड से। रस्किन बॉण्ड के साक्षात्कार के बारे में मिले आदेश से ज्यादा अचंभित करनेवाली घटना हमें ये लगी। खैर, ये तो बस हमारे लिए एक शुरुआत थी। रस्किन ने हम सिर्फ हमसे बात की बल्कि हमें मिलने का समय भी दे दिया। दो दिन रस्किन बॉण्ड के साथ... ये थी एक यादगार सफर की शुरुआत। मसूरी का नाम सुनते ही गर्मियों में सर्दी का अहसास होने लगा था। दिल्ली की आपाधापी से हम लोग धीरे-धीरे दूर और मसूरी के यानि कि रस्किन की शांति और सौम्यता के करीब होते चले गए। मसूरी पहुंचे होटल बुक की और रस्किन बॉण्ड के घर के रस्ते को खोजने निकल पड़े। लेण्डोर, मसूरी शहर की जुड़वा बहन। यही रहते है रस्किन बॉण्ड अपने गोद लिए हुए परिवार के साथ रहते है। बस कुछ थोड़ा सा ही भटकने के बाद हम पहुंच गए रस्किन के घर। विशुद्ध दादा या नाना की छवि को पेश करते रस्किन हमारे सामने थे। मैं बस उन्हें चुपचाप देख रही थी। मेरी अंग्रेजी की समझ बहुत कम है इसलिए मैं ने चुप रहना ही ठीक समझा। लेकिन, उन्हें मुझसे भी बात करना थी। वो लगातार मुझे कुछ न कुछ पूछे जा रहे थे। एक गोलू-मोलू, गोरा-सा, चश्मा लगाए हुए, सलीके से बालों को काड़े हुए आदर्श दादाजी मेरे सामने बैठे थे। हालांकि उन्हें देखने के बाद मुझे इस बात पर यकीन हो गया कि मेरे पापा भी कुछ ऐसे ही प्यारे दादा लगनेवाले है। खैर, रस्किन भी हमसे मिलकर खुश नज़र आ रहे थे। पहली बात जो उन्होंने हमसे कही वो ये थी कि लेखकों को पढ़ा जाना चाहिए न कि देखा। फिर वो इस बात को लेकर भी चिंतित थे कि वो सलमान खान की तरह नहीं लगते है। तीन दिन तक चली इस मुलाकात में हमने उन्हें घर पर शूट किया। थोड़ी देर में ही वो समझ गए थे कि रोलिंग का क्या अर्थ होता है। जैसे ही मैं चिल्लाती रोलिंग वो प्रोफेशनल की तरह काम करने लगते थे। उन्होंने हमें अपनी अप्रकाशित कविता सुनाई। अपने कमरे में लगे लॉर्रेन और हार्डी की तस्वीर दिखाई जिन्हें वो अपना आदर्श मानते है। अपने पिता के खिंचे हुए फोटो और कमरे में उगे हुए टमाटर दिखाए। खिड़की से दिखाई देता पहाड़ दिखाया। खूब सारी बातें की। हमारे साथ पहाड़ों पर चढ़े। ड्राइवर साब से अपनी मसाला हिन्दी में बात की। पहाड़ों पर शूट करते हुए हमे कहा कि अरे असल में रोलिंग मत शुरु कर देना। मैं उन्हें सिर्फ देख रही थी। कुछ बोलने की मेरी हालत ही नहीं थी। मैं बस इतना चाहती थी कि उन्हें सुनती रहूँ और सब कुछ सहेज लूं। लेकिन, वो मुझसे कुछ न कुछ बात कर ही रहे थे। अचानक मुझसे पूछते है क्या आप हमेशा चश्मा लगाए रहती है। मैंने हां में सर हिला दिया। फिर अचानक से पूछा क्या आप शादीशुदा है मैंने जब हां कहा तो कहने लगे कि अरे आप तो बहुत छोटी लगती है शादी के हिसाब से। मेरे एक साथी ने कहा कि वो प्यार में थी। तो अचानक वो अपनी प्यार के दिन और लम्हों के बारे में बात करने लगे। एख दिन हम रस्किन के साथ माल रोड की उस दुकान पर गए जहां वो हर हफ्ते जाते है। दो घण्टे बिताते है और दर्जनो किताबों पर दस्तख्त करते है। रस्किन से मिलने के लिए लोग आतुर हुए जा रहे थे। वो बड़े प्यार से सबसे मिल रहे थे। फोटो खिंचवा रहे थे और ऑटोग्राफ दे रहे थे। मेरी फरमाईश पर उन्होंने लाल स्वेटर पहना था। मैं चुपचाप बस उन्हें देख रही थी। ऐसा लग रहा था कि 17 साल का रस्टी ही हमारे साथ माल रोड पर घूम रहा है। वो सभी सुना रहे थे कि सात खून माफ में उन्होंने प्रियंका को किस करनेवाला सीन दस बार में सही किया था। वो हंस रहे थे। खुश हो रहे थे। मैं उनके पास बैठी रही उन्हें बोलते सुनती रही... उनसे किताब पर ऑटोग्राफ लिया, फोटो खिंचवाया...
 रस्किन बॉण्ड के जीवन को टीवी के दर्शकों के सामने लाना एक मुश्किल काम लग रहा था। कैसे होंगे वो, कहीं गुस्सा तो नहीं करेंगे, कहीं थक तो नहीं जाएगे जल्दी से और न जाने क्या-क्या। लेकिन, उनके साथ समय कब बीत गया मालूम ही नहीं चला। इतनी सादगी से ज़िंदगी को जीता, अपने अति सामान्य घर के किताबों से भरे टेबल पर बिस्तर पर बैठकर कहानियां लिखता, प्रशंसकों से प्यार से मिलता और हमेशा मुस्कुराता रस्टी अब कभी मेरा साथ नहीं छोड़ेगा। रस्किन बॉण्ड सिखाते है सादगी के साथ ज़िंदगी को जीना और खुश रहना....

3 comments:

राजन अग्रवाल said...

BHAI WAH.. BAHUT ACHHE... SUPER LIKE... UTNA HI SADGI PURN VIVRAN

राजन अग्रवाल said...

bhai wah.. bahut khubsurat aur sadgi se bhara vivran... ise bhi dekhne ki koshish karunga....

H P SHARMA said...

shandar rahi ye mulakat. badhaai.