Wednesday, July 1, 2009

मॉनसून का रोमांस...

दिल्ली में मॉनसून ने दस्तक दे दी है। साथ ही साथ देश का लगभग सत्तर फ़ीसदी हिस्सा मॉनसून से हल्का फुल्का ही सही भीगने लगा है। गर्मी से राहत अब मिलने लगी है और हवाओं में घुली नमी गर्मी से शुष्क हो चुके मन में एक बार फिर ये उम्मीद जगाने लगी है कि जीवन ख़ूबसूरत है। दिल्ली की इस बारिश में मैं दो बार भीग चुकी हूँ और सच में एक अजीब सी संतुष्टि मिली है बरसात की बूंदों को खुद पर गिरता पाकर। लेकिन, इन सभी खुशियों के बीच भी मन में कहीं एक कोना ऐसा है जहाँ कुछ अटका हुआ है। ये शायद गरमी के आतंक के कुछ बाक़ी निशान है जो अभी तक मिटे नहीं है। सच में बेहद ही भयावह थी गर्मी किसी-किसी दिन तो सांस तक लेने में तक़लीफ़ होती थी। पानी क़िल्लत ने तो कइयों की जान ले ली थी। ऐसे में जब अपने रूम की खिड़की से मैं पानी को बसरते देखती हूँ तो लगता है कि कितना क़ीमती है पानी हमारे लिए और हमें इसकी कद्र नहीं। कैसे हम पानी को यूँ बह जाने देते हैं। इस आधुनिक साधन सम्पन्न समाज ने केवल आज में जीना सीख लिया है। आज बारिश है तो खूब भीगो इसमें और कल सूखा पड़ेगा तो पानी के लिए मार करो। क्यों बारिश की इन बूंदों के धरती को छूते ही हम पर रोमांस छा जाता है हम इतने खुश हो जाते हैं कि गर्मी के दर्दों को इतनी जल्दी भूल जाते है। क्यों हम आगे के बारे में नहीं सोचते। नालियों में यूँ बारिश के पानी को हम बह जाने देते है। बोरिंग करने के लिए आतुर हम लोग क्यों घरों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाते। खैर, मौसम ख़ुशमिजाज़ है और लोग भी खुश है तो आप भी रहिए...

2 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

bahut hi intzaar ke din dikhane ke baad maansoon aayi to achcha lagana swabhavik hai..

waise ab jakar thodi thodi hariyali dekhane ko mil rahi hai..

kitana sundar..badhiya vichar
dhanywaad..

अनिल कान्त : said...

अच्छे विचार ...अच्छी बात