Wednesday, September 17, 2008

साफ सुथरे हम लोग...

हाल ही में हाइजीन काउन्सिल ने एक सर्वे रिपोर्ट जारी की है। सर्वे के मुताबिक़ भारतीय घर गंदगी के मामले में नंबर दो है। उसके मुताबिक़ हमसे ज़्यादा गंदगी केवल मलेशियाई फैलाते हैं। और सबसे ज़्यादा साफ सुथरे हैं सऊदी अरेबिया के घर। ये सर्वे दुनिया के सात देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, साऊथ अफ्रीका, मलेशिया, सऊदी अरेबिया, जर्मनी और भारत में किया गया है। इस सर्वे से जुड़ा एक बड़ा तथ्य है इससे जुड़ी कंपनियाँ। जो है डेटॉल और लाइज़ॉल। ये दोनों ही कंपनियाँ घर को साफ-सुथरा और हाईजीनिक बनाने वाले उत्पाद बनाती हैं। यानि कि इस सर्वे के पीछे मक़सद भारतीयों को डराना और अपने उत्पाद बेचना भी हो सकता हैं। सर्वे की पूरी रिपोर्ट आप यहाँ देख सकते हैं -

http://www.hygienecouncil.com/india/
रिपोर्ट के मुताबिक़ टॉयलेट सीट या किचन सिंक से ज़्यादा कीटाणु फोन के रिसीवर, टीवी के रिमोट या लाइट स्वीच पर होते हैं। सर्वे बताता है कि तक़रीबन 48 फ़ीसदी भारतीय छींकने या खांसने के बाद हाथ नहीं धोते हैं और तक़रीबन 21 फ़ीसदी भारतीय खाना खाने से पहले हाथ नहीं धोते। सर्वे में और भी कई बातें बताई गई हैं। इस सर्वे रिपोर्ट के बाद मैंने कुछ ऐसे लोगों से बात की जो दिल्ली की रेहड़ियों पर बिकनेवाला खाना खाते हैं और सार्वजनिक नलको से पानी भरते हैं। धूल-मिट्टी के बीच गंदगी से बने खाने को खानेवाले इन लोगों को यही खाना भाता है। सभी ने यही कहा कि अब इतना तो चलता है। लोगों के मुताबिक़ ये खाना आसानी से मिल जाता हैं। जब उनसे इस रिपोर्ट के बारे में बात की तो सभी ने कहा कि नहीं भाई हम तो एकदम साफ-सफाई से रहते हैं घर में। वो तो जो झुग्गी में रहनेवाले हैं वो ऐसे रहते हैं। ये कुछ ऐसा ही था जैसे एड्स लोगों को होता हैं हमें नहीं या फिर गुटखा खानेवालों का ये कहना कि हमें कैंसर थोड़े होगा। फिर बात कि शक्करपुर में एक मंदिर के आगे लगे सार्वजनिक नल से पानी भरते लोगों से। नल के आसपास गंदगी का अंबार था। लोग वही थूक रहे थे और पानी भर रहे थे। लोगों ने बड़े आराम से कहा - अब मैडम, इतना तो चलता है। इतनी गंदगी को तो हम गंदगी ही नहीं मानते हैं। फिर उनसे पूछा तबीयत ख़राब हो गई तो... जवाब मिला वो कहाँ यूँ ही ठीक रहती है। फिर मौत को आना होगा तो आ ही जाएगी। कइयों का मानना था ये पानी सीधे गंगा का। मैंने पूछा कि यहाँ कहाँ गंगा... अरे मंदिर के आगे है और पुजारीजी ने कहा है तो गंगा का ही पानी है। अब इसके आगे कुछ कहना धार्मिक आस्था को चोट पहुंचा सकता था सो मैं चुप रही। फिर कुछ गृहणियों से बात की सभी का एक ही जवाब - झूठ है सब, हमें बदनाम करते हैं। हमारा घर तो एक दम साफ है। बच्चों को भी अच्छी आदतें हैं। ये सब तो अंग्रेजों के चोंचलें हैं।
इस पूरे मुद्दे पर आम भारतीय नागरिक की सोच और हाईजीन काऊंसिल की चिंताएं दो अलग-अलग छोर लगती हैं। आप भी इस रिपोर्ट को पढ़े और अपनी राय दें...

2 comments:

Ranjan said...

हर जगह और व्यक्ति का अपना immune system होता है.. और इन सब का सामना कर हम अपने शरिर का immune system काफी तगड़ा कर लेते है..

आदते अच्छी होनी ही चाहिये.. पर....

दिनेशराय द्विवेदी said...

सफाई तक पहुँचने में बहुत वक्त लगेगा। पहले हम भारतीय दो वक्त का खाना, रात को सोने को एक छत और शरीर ढकने को कपड़ा तो जुटा लें।