Friday, December 19, 2008

आज का तापमान...

अगर आप दिल्ली की सर्दी का मज़ा लेना चाहते हैं। सर्दियों में मफलर, कोट और टोपे का मज़ा लेना चाहते हैं। तो अगली बार घर से निकलने के बाद अपने आस-पास लगे इन आर्ट पीसेस को ज़रूर देखें...

आज 19 तारीख है, महीना दिसम्बर का है।
मैं दिल्ली में हूँ और अगर मैं दिन के बारह बजे रूम से बाहर निकलती हूँ तो बिना स्वेटर के... कल से पहले मैंने इस बात पर गौर नहीं किया था। कल जब 48 डिग्री सेल्सियस के वॉलेन्टीयर प्रत्युश ने मुझसे ये कहा तो मुझे भी आश्चर्य हुआ। उसने कहा कि क्या आप कभी सोच सकती थी कि ठंड के दिनों में आप ऐसे रह सकती हैं, वो भी दिल्ली जैसे शहर में। ये असर है ग्लोबल वार्मिंग का। इसके बाद प्रत्युश और उसके साथियों ने मुझे जुगाड़ दिखाया। जुगाड़ एक आर्ट पीस है। ये दिल्ली के रामलीला मैदान में लगा हुआ है। तेल के खराब पीपों से बना ये जुगाड़ बस स्टाप पर छाया दे सकता है। इसके नीचे कुछ पीपे चोकोर आकार में रखे हुए थे। मैंने पूछा ये क्या है... जवाब मिला फ़्यूचर बेड। लकड़ी ख़त्म होगी तो इसी पर सोना पड़ेगा हमें... ये सब देखकर मेरा सिर चकरा गया। लगाकि ये हैं हमारा भविष्य...
ये भविष्य हमें दिखा रही है 48 डिग्री सेल्सियस... इस संस्था ने पूरी दिल्ली में पब्लिक आर्ट गैलेरी लगाई हैं। मंडी हाउस, रामलीला मैदान, जंतर मंतर, बाराखंबा... हर जगह ये आर्ट पीसेस लगे हुए हैं। मक़सद है कला को गैलेरी से निकालकर आम जनता तक लाना... और इन कलात्मक नमूनों के ज़रिए आम जनता को ग्लोबल वार्मिंग समझाना। मंडी हाउस पर गिद्धों की बड़ी तस्वीरें लगा रखी हैं। जिनके पास प्रत्युश के जैसे ही कई कॉलेज छात्र खड़े रहते हैं, लोगों को इस विलुप्त होती जाति के बार में बताने के लिए। इसी तरह जंतर-मंतर पर एक एलसीडी पर फ़िल्मों के ज़रिए इसे समझाया जा रहा है। वही रामलीला मैदान में एक ऐसा कलात्मक नमूना खड़ा किया गया है जिसमें आप एक पल भी खड़े नहीं हो सकते हैं। वजह ये कि इसकी संरचना कुछ ऐसी है कि ग्लोबल वार्मिंग का भविष्य एक पल में आप महसूस कर सकते हैं। इसके अंदर सामान्य रूप से तापमान 50 डिग्री के आसपास रहता हैं। और, अगर 48 डिग्री सेल्सियस की माने तो यही हमारा भविष्य है। इस आर्ट गैलेरी के साथ-साथ ये संस्था कई वार्ताएं भी करवा रही हैं। वो भी सड़क के किनारे... साथ ही स्कूली बच्चों को भी इस बारे में सजग करने का काम रही हैं। लेकिन, अफसोस ये है कि दिल्ली की आधी जनता भी इस बारे में कुछ नहीं जानती हैं। आते जाते सड़क किनारे लगे इन आर्ट पीसेस को देखकर वो अनदेखा कर रही हैं। तक़रीबन 15 दिन से चल रहे इस मूवमेंट को किसी मीडिया ने भी कवर नहीं किया। अगर आप दिल्ली में रह रहे हैं और रोज़ाना सड़क पर चलते हैं तो अगली जब आपको ये आर्ट पीस जहां भी नज़र आए, एक बार रूके ज़रूर और वहां खड़े लोगों से पूछे कि आखिर ये क्या हैं। हमारी धरती 48 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो चुकी है, अगर आप इसे और गर्म नहीं करना चाहते हैं तो इस तरफ ध्यान दे...

2 comments:

Vinay said...

बहुत सरस बात है!

sangita puri said...

ग्‍लोबल वार्मिंग की वजह से तापमान में कुछ बढोत्‍तरी तो अवश्‍य हुई है , पर कारण सिर्फ यही नहीं , जनवरी में मौसम ठंडा होगा ,पढिए इस लेख को भी
http://sangeetapuri.blogspot.com/2008/11/25.html