Thursday, May 7, 2009

ये दिल्ली है मेरे यार?

आज दिल्ली बहुत प्यारी लग रही है। ऐसी जैसी कि पिछले तीन सालों में मुझे कभी नहीं लगी। सड़क पर बस यूँ दौड़ रही है कि आज ही ट्रैफ़िक की कै़द से छूटी हो। ताज़ी हवा सीधे मुंह पर लग रही थी। आज मालूम चला कि सच में दिल्ली की सड़कें चौड़ी हैं। आज 20 मिनिट के ऑफ़िस के सफ़र में 2 घंटे नहीं लगे। छुट्टी के दिन भी ऑफ़िस में काम कर रहे मेरे सभी साथियों के चेहरे खिले हुए है, क्योंकि कोई भी जाम कि किचकिच और भीड़ की किचपिच से निकलकर नहीं बल्कि खुली में सांस लेते हुए यहाँ तक पहुंचा हैं। सभी के मुंह पर एक ही बात है - यार, मुझे ऐसी ही दिल्ली में रहना है....

3 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

एकदम सही बात. मैं भी दिल्ली की सड़कों की वीरानी से सहमत हूँ.

हर्षवर्धन said...

मन की बात कह दी

Vivek Rastogi said...

बिल्कुल सही आज कोई ट्राफ़िक नहीं था, बड़ा सुकून था आज ।